Mithila BhumiMithila Bhumiमिथिला भूमि
बाबा कपिलेश्वर स्थान

अपनी मिथिला, अपनी संस्कृति, अपना गौरव।

मिथिला भूमि

अपने धाम खोजें। गाँव लौटें। अपनों के साथ पर्व मनाएँ।

गढ़ बरुआरी · हरिद्रा नदी तट

बाबा कपिलेश्वर स्थान

कपिल मुनि की तपोस्थली — श्रावण में कांवरियों से गूँजता प्राचीन शिवधाम।

नक्शे पर देखें

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14+

धाम एवं मंदिर

5

गाँव · एक परिवार

3

भाषाएँ

5

सांस्कृतिक क्षेत्र

मिथिला के एक गाँव में

एक दिन, भोर से रात तक

भोर · 5 बजे

घाट पर पहला अर्घ्य

सूरज उगने से पहले ही माँ-बहनें पानी में खड़ी होकर गीत गाती हैं।

सुबह · 7 बजे

बाबा के दरबार में घंटियाँ

कपिलेश्वर स्थान में जल चढ़ता है, गाँव का दिन यहीं से शुरू होता है।

दोपहर · 12 बजे

धान के खेतों में

कोसी की उपजाऊ मिट्टी, हरे खेत और काम के बीच हँसी-ठिठोली।

तीसरा पहर · 3 बजे

आँगन में रंग

दीवारों पर मछली, कमल और सूरज — मधुबनी चित्र पीढ़ी दर पीढ़ी।

साँझ · 6 बजे

माछ, पान, मखान

पोखर से मखाना, चूल्हे पर खाना, मेहमान के लिए पान।

रात · 8 बजे

दीयों में दमकता मंदिर

आरती, ढोल और सामा-चकेवा के गीत — मिथिला की रात।

Mithila painting artist at work
© Pallav.journo · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons

मिथिला

जीवित विरासत की भूमि

मिथिला — मैथिली भाषा, विद्यापति जैसे महाकवियों, मधुबनी चित्रकला और छठ, सामा-चकेवा, मधुश्रावणी जैसे पर्वों की भूमि है, जो आज भी गाँव के जीवन को आकार देते हैं।

मिथिला भूमि — मिथिला से प्रेम करने वाले हर व्यक्ति का घर। गाँव में रहने वाले हों या दूर बसे, आइए मिलकर अपनी विरासत सँजोएँ।

मिथिला को जियें

देखिए, चखिए, महसूस कीजिए

“देसिल बयना सब जन मिट्ठा”

अपनी भाषा की बोली सबको मीठी लगती है।

— महाकवि विद्यापति

मिथिला — एक नज़र में

तीन हज़ार वर्षों की संस्कृति, आज भी जीवित

सीता की जन्मभूमि

राजा जनक की नगरी — पुनौरा धाम और जनकपुर आज भी आस्था के केंद्र हैं।

विद्वानों की धरती

याज्ञवल्क्य, मंडन मिश्र, भारती और महाकवि विद्यापति की परंपरा।

मैथिली भाषा

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल, अपनी लिपि तिरहुता के साथ।

मधुबनी चित्रकला

आँगन की दीवारों से विश्व मंच तक पहुँची GI-टैग प्राप्त कला।

मखाना और मछली

“पग-पग पोखर, माछ, मखान” — ताल-तलैयों से जुड़ा भोजन और जीवन।

पर्व और संस्कार

छठ, सामा-चकेवा, मधुश्रावणी, कोजगरा — हर ऋतु का अपना उत्सव।

मिथिला का पर्व-चक्र

हर ऋतु, एक उत्सव

श्रावण

मधुश्रावणी

नवविवाहिताओं का 13 दिन का व्रत

आश्विन

दुर्गा पूजा · कोजगरा

पूर्णिमा की रात मखाना और पान

कार्तिक

छठ · सामा-चकेवा

सूर्य को अर्घ्य, भाई-बहन का पर्व

अगहन

नवान्न · विवाह पंचमी

नई फसल और राम-सीता विवाह

माघ

श्री पंचमी

सरस्वती पूजा, विद्या का उत्सव

फागुन · चैत

फगुआ · जुड़ शीतल

रंग, होरी गीत और मैथिल नववर्ष

तीन कदम में अपनी मिथिला यात्रा

अपनी यात्रा शुरू करें

प्रमुख धाम — वास्तविक तस्वीरें

सांस्कृतिक कार्यक्रम

कोसी की धरती — झलकियाँ

Chhath Puja
© M27SHRA · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Kosi bridge
© Varunesh Chandra · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Paddy fields
© Suyash.dwivedi · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Sama-Chakeva
© Anand Rishav · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Makhana
© FacetsOfNonStickPans · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Matsyagandha lake
© Aditya Kumar In · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
Madhubani paintings
© Mithiart.com · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons